Munshi Premchand Books मुंशी प्रेमचंद

Munshi Premchand Books मुंशी प्रेमचंद

Munshi Premchand Books

Munshi Premchand Books

Dear Friends, आज हम मुंशी प्रेमचंद की जवानी (Munshi Premchand ki Jivani) पर चर्चा करेंगे | मुंशी प्रेमचंद जी ने अपने जीवन में कौन कौन सी उपान्यास, कहानियाँ आदि लिखी है आज हम इस विषय पर भी संक्षिप्त में चर्चा करंगे | मुंशी प्रेमचंद ने अपने जीवन में लगभग 15 उपन्यास, 3 नाटक, 7 से अधिक बाल पुस्तके और अनेक पत्र पत्रिकाओ का सम्पादन किया | आज हम इन सभी के बारेमे चर्चा करेंगे |

 

मुंशी प्रेमचन्द का जीवन परिचय

 

जन्म तिथि 31 जुलाई 1880
जन्म स्थानउत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी शहर के निकट लमही गाँव
पिता का नामअजायबराय
माता का नामआनंदी देवी

 

मुंशी प्रेमचन्द का जन्म 31 जुलाई 1880 को हुआ | मुंशी प्रेमचन्द का जन्म स्थान भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी शहर के निकट लमही गाँव है | उनक बचपन का नाम तथा वास्तविक नाम धनपतराय श्रीवास्तव था | उन्हें मुंशी प्रेमचन्द और नवाब राय से भी जाना जाता था | इनके पिता का नाम अजायबराय था और माता का नाम आनंदी देवी था ।

इनके पिता लमही गाव में ही डाकघर के मुंशी थे | जब मुंशी प्रेमचन्द 7 वर्ष के थे to उनकी माता का देहांत हो गया था उसके बाद इनके पिता की नौकरी गोरखपुर में हो गया | गोरखपुर में आने के बाद उनके पिता जी ने दूसरी शादी कर ली | प्रेमचन्द को अपनी सौतेली माँ से अपनी माँ जैसा प्यार नही मिला | लगभग 14 वर्ष की आयु में उनके पिता जी का भी देहांत हो गया | इनके बचपन का समय बहुत ही कष्ट से बीता।

 

विवाहित जीवन 

15 वर्ष की आयु में ही इन्होने शादी कर ली | इन्होने विधवा विवाह का समर्थन भी किया | समर्थन करने के बाद इन्होने दूसरी शादी शिवरानी देवी के साथ कर ली |

इनके तीन सन्तान थे (दो बेटे और एक बेटी) |

  1. श्रीपतराय
  2. अमृत राय
  3. कमला देवी

मुंशी प्रेमचन्द कठिनाईयों का सामना करना पड़ा [परन्तु कभी हार नहीं मानी और कालजयी रचना की जो की आधुनिक हिंदी की सर्वश्रेष्ट रचना साबित हुए | बीमारी की वजह से मुंशी प्रेमचन्द की 8 अक्टूबर 1936 को  मृत्यु हो गयी | मृत्यु के  कारण इनका आखिरी उपन्यास मंगलसुत्र तो पूरा नही हो पाया | बाद में मंगलसुत्र को उनके बेटे अमृत राय ने पूरा किया | इसी प्रकार उन्होंने अपनी पूरी जिन्दगी हिंदी और उर्दू लेखन को समर्पित कर दिया |

 

 उपन्यास, नाटक,  बाल पुस्तके

उन्होंने अपनी पूरी जिन्दगी हिंदी और उर्दू लेखन को समर्पित कर दिया | मुंशी प्रेमचंद ने अपने जीवन में लगभग 15 उपन्यास, 3 नाटक, 7 से अधिक बाल पुस्तके लिखी थी जो निम्नलिखित है |

उपन्यास

  • गोदान
  • कर्मभूमि
  • निर्मला
  • कायाकल्प
  • रंगभूमि
  • सेवासदन
  • गबन

नाटक एवं बाल पुस्तके

  • नमक का दरोगा
  • दो बैलो की कथा
  • पूस की रात
  • पंच परमेश्वर
  • माता का हृदय
  • नरक का मार्ग
  • वफ़ा का खंजर
  • पुत्र प्रेम
  • घमंड का पुतला
  • बंद दरवाजा
  • कायापलट
  • कर्मो का फल
  • कफन
  • बड़े घर की बेटी
  • राष्ट्र का सेवक
  • ईदगाह
  • मंदिर और मस्जिद
  • प्रेम सूत्र
  • माँ
  • वरदान
  • काशी में आगमन
  • बेटो वाली विधवा
  • सभ्यता का रहस्य

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